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बदलते समय का जागरण

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मीडिया का स्वरूप जिस तेजी के साथ बदल रहा है वह मेरे लिए भी एक आश्चर्य का विषय है। अभी कल की ही सी बात लगती है कि जब टीवी पर समाचार देखना-सुनना अपने आपमें आश्चर्यजनक लगता था। उसके बाद इंटरनेट आया जिसने पूरे विश्व में सूचना क्रान्ति ला दी। हमारा अखबार भी इसमें पीछे नहीं रहा और 1998 में जागरण.कॉम के भी छोटे से स्वरूप का जन्म हुआ। इसे बहुत सराहा गया। पहले कुछ वर्षो तक विदेशों में बस रहे हमारे पाठकों ने इसे सिर आंखों पर लिया। अस्सी प्रतिशत ट्रैफिक जागरण.कॉम पर विदेशों से आता था। इधर भारत भी करवट बदल रहा था और देखते ही देखते घर-घर में कम से कम शहरों में तो कम्प्यूटर आने लगे और विदेशों के साथ-साथ अब जागरण डॉट कॉम की साइट पर अपने देश से भी सैकड़ों की तादाद में विजिटर आ रहे हैं। आज स्थिति यह है कि जागरण की वेबसाइट पर कुल पेज व्यूज में से दो-तिहाई भारत से और एक-तिहाई भारत के बाहर से आ रहे हैं।

विश्व भर के अखबार समाज को उसके और नजदीक लाने के लिए नई-नई तकनीक को अपनाते चले जा रहे हैं । कुछ वर्ष पूर्व ब्लॉगिंग एक सामाजिक क्रान्ति के रूप में आया था। हम भी इससे अछूते नहीं रह सकते। लिहाजा हमने जागरण जंक्शन नाम से एक ब्लॉंगिंग साइट शुरू की है क्योंकि अखबार में सीमित जगह होती है और हम अपने हर पाठक और पत्रकार को अखबार में छापने की जगह नहीं दे सकते। लिहाजा ब्लॉग एक उपयुक्त माध्यम होगा जहां पर पाठक और हमारे पत्रकार अपने विचार प्रकट कर सकते हैं तथा उसकी प्रतिक्रिया भी जान सकते हैं। विचारों के इस आदान-प्रदान से जहां हम कुछ नई संभावनाओं को तलाश पाएंगे, वहीं हमें इस बात का भी ज्ञान मिलेगा कि हमारे पाठक हमसे चाहते क्या हैं । दैनिक जागरण समाज के इस तेजी से बदलते हुए स्वरूप की चुनौती को स्वीकार करता है और इसके लिए हमेशा प्रयासरत रहेगा कि तकनीक के नए आयामों को अपनाकर हम समाज के और करीब जा सकें। आज हमने जागरण जंक्शन के नाम से एक ब्लॉग साइट शुरू की है। फेसबुक व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर हमारे पेज पहले से हैं। नए साल की यह शुरुआत हमारी डिजिटल मीडिया टीम के लिए उत्साहजनक रही है और मैं आशा करता हूं कि वह अपना उत्साह बरकरार रखते हुए तकनीक के नए-नए प्लेटफार्म दैनिक जागरण के साथ जोड़ती रहेगी।



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Preeti Mishra के द्वारा
February 23, 2010

निरंतर बदलते रहने के अंदाज़ ने ही जागरण को नंबर १ का दर्ज़ा दिलाया है. निरंतर बढ़ते रहने के लिए creative ideas की जरूरत होती है, जागरण के पास इसकी भरमार है. आशा है जागरण भविष्य में भी इसी अंदाज़ में आगे बढता रहेगा.

Ashok Singh Bharat के द्वारा
February 5, 2010

आदरणीर्य संपादक जी, नमस्कार, इस शुरूआत ने जागरण समूह की यह कहावत कि यह बदलते जमाने का अखबार है को चरितार्थ करती है। नि-संदेह यह बदलाव हमलोगो को जहां नए पाठकों को सीधे जोड़ेगा, वही पर निरंतर जारी यह नवीनता हमारी जीवंतता को भी उजागर कर रही है। सच यह कि सिर्फ जीवित आत्मा ही यह नारा बुलंद कर सकती है कि हम पत्र ही नही मित्र भी है। बदलाव की यह पहल नित नए कीर्तिमान स्थापित करती जा रही है। इसके लिए आपकी कुछ नए बने रहने की बलवती चाहत को साधुवाद देता हुं। यह सोच इस समूह को गतिमान बनाए रखे हुए है। हर गतिमान चीज में जीवन का संचार रहता है। और इसी के चलते ही हमलोग अपने पाठकों से हर बार नए रूप में मिलते रहते है। मेरा अनुरोध है कि बदलाव की मुहिम में अपने पाठको से की गई पऱतिबद्धता का भी ध्यान रखे। क्योकि हमलोगो के अपने कुछ पारंपरिक पाठकगण आर्थक रूप से इतने समर्थ नहीं है कि वो लोग वर्तमान सूचना कऱांति में हुए परिर्वतन का लाभ उठा सके। इस तरह से कहीं अनजाने में ही इनको अपने से दूर न कर बैठे। कुछ भी हो यह बदलाव मेरे लिए वरदान साबित हुआ है, क्योकि इस माध्यम के बगैर मैं कभी भी आपसे सीधे संवाद स्थापित नहीं कर पाता। रूबरब होने का यह नया अहसास मुझे रोमांचित कर रहा है। मैं अपने को बड़ ही खुशनसीब मान रहा हू। कम से कम अब मैं गर्व से कह सकूंगा कि संपादक जी से मेरी सीधी बात चीत है। इस नई पहल को सहर्ष सुविकारते हुए आपको लाख लाख बधाई देता हू। अर्ज है एक गीत- रूप तेरा ऐसा दर्पण में न समाए..खुशबू तेरे मन की, मधुवन में न समाए..ओ ..मुझे खुशी मिली इतनी..कि मन में समाए, पलक बंद कर लू …कहीं…छलक ही न जाए.

jagsuneel के द्वारा
January 24, 2010

jagran ka yah kadam vastav mein krantikari hai. http://www.jagran.com ke bad bloging ki duniya me pravesh karna nai chunatiyon ko sweekaar karne vala aur doordarshi kadam hai. print ka apna mahatva hai lekin net reporting aur views ko nakaara nhi ja sakta. mera ek chota sa sujhav hai jagran.com ke baare mein……please ho sake to new launched four editions jisme ayodhya shamil hai usko be e-paper me shamil kar lein to mere jaise hazaron pathak usse jud sakenge. suneel pathak

saroj awasthi के द्वारा
January 21, 2010

Jagran junction customer connet ki disha may ek krantikari begining.

Pradeep Mishra के द्वारा
January 15, 2010

बधाई स्वीकारें ब्लागिंग की नई पहल के लिए। आपके संस्थान में बहुत लिक्खाड़ हैं। अखबार में तो वही छपता है, जो नीतिगत है। अब मन में कुलांचें मारने वाले विचार भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेंगे। अपने लोगों को छुट्टा छोड़ दें। शायद इतिहास, जीवन दर्शन, साहित्य और राजनीति के नए आयामों का पता चल सकेगा। ब्लाग लेखकों के लिए सिर्फ इतनी नीति बनाइए, जिसमें व्यक्तिगत छींटाकशी और अश्लीललता न आने पाए। मुझे लगता है कि जागरण जैसे विशाल नेटवर्क से जुड़े लोग ही झिझक छोड़कर लिखने लग जाएं, तो इसकी लोकप्रियता में चार चांद लग जाएंगे।

Ram Kumar Pandey के द्वारा
January 12, 2010

हिंदी भाषा के विकास और जनता को जागरूक करने में दैनिक जागरण निरंतर नेतृत्वकारी भूमिका में रहा है.हिन्दी में ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म का यह कदम उसी दिशा में एक नई पहल है. जनभावनाओं को आवाज देने का आपका यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है.

rakesh bhartiya के द्वारा
January 11, 2010

ब्लॉग की दुनिया मे परवेश करने पर जागरण परिवार को बधाई,जिस पारकर देश की आज़ादी से पूर्व १९४२ से जागरण पर्काशन की शुरुआत कर जागरण ने आज़ादी दिलाने मे महतवपूर्ण योगदान दिया था अव् ब्लॉग के माद्यम से देश वासिय्नो की अभिवयक्ति की स्वतंत्रता को नया आयाम देगा धन्यवाद् राकेश भारतीय ऑस्ट्रेलिया

Sanjay Bhardwaj के द्वारा
January 10, 2010

दैनिक जागरण समूह द्वारा पाठकों से जुड़ने के लिए किए जा रहे नित नए प्रयोगों की सराहना करता हूं। ब्लॉगिंग की दुनिया में जागरण के कदम रखने की बड़ी शिद्दत से प्रतीक्षा की जा रही थी। आज यह मूर्त रूप ले सका, इसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं। आशा करता हूं कि आपके मार्गदर्शन में जागरण समूह इसी प्रकार से अभिनव प्रयोग करता रहेगा। -धन्यवाद संजय भारद्वाज


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